Saturday, October 6, 2012

दिल्ली बहुत दूर है


दिल्ली बहुत दूर है 
दिल्ली बहुत दूर है 
असम में जलती झोपड़ियों से 
दिल्ली बहुत दूर है 

सेवक ने सत्ता पायी 
सत्ताधारी मंगरूर है 
दिल्ली बहुत दूर है 

कृषि प्रधान में मरे किसान 
यहाँ सत्ता का दस्तूर है 
दिल्ली बहुत दूर है 

सवा अरब में तांबा जीत के 
खुश  होते लंगूर हैं 
दिल्ली बहुत दूर है 

कड़वे सच या मीठे वादे 
हम वादों में मशहूर हैं
दिल्ली बहुत दूर है 

पेड़ पे लटकी हांडी से 
चिंगारी बहुत दूर है 
दिल्ली बहुत दूर है  
दिल्ली बहुत दूर है 

संदीप 

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