Saturday, October 6, 2012

प्रार्थना :


तुम्हें एक लफ़्ज़ में कैसे बयाँ करता
कि मुझे तुमसे जितनी लगन थी
वो थोड़ी नहीं थी
समंदर की एक बूँद भी समंदर ही होती है
जब कोई साइंसदान तुम्हें बताता है
god particle के बारे में
तुम झट से मान लेते हो
मेरी प्रार्थनाएं तुम्हें ढकोसला लगती हैं
मेरे मन्त्रों में मंगल को पृथ्वी पुत्र कहा गया
तुमने यक़ीन नहीं किया
तुम निकल पड़े दूरबीन लेकर
चाँद पर पानी और मंगल पर जीवन खोजने
तुम्हारा logic हर सच को झुठला कर
बाद में माफ़ी मांग लेता है
पर मेरा सच मेरी प्रार्थनाओं में है
और प्रार्थनाओं का कोई logic नहीं होता

संदीप

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